कृपानुकम्पा कारुण्यमानृशंस्यं च भारत
तथाSSर्जवं क्षमा सत्यंकुरूप्वेतद् विशिष्यते।। महाभारत. उ.
कृपा अनुकम्पा, करुणा, अनृशंसता क्षमा और सत्य।
कृपा - दूसरों को सुख पहुंचाने की सहज भावना
अनुकम्पा - दूसरों का दु:ख देखकर द्रवित होना एवं कांप उठना अनुकम्पा
करुणा- दूसरों के दुखको दूर करने का भाव
अनृशंसता - क्रूरता का सर्वता अभाव
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