रविवार, 11 जुलाई 2010

प्रधनमंत्री पद के लिए गीता की शपथ

प्रधानमंत्री के पद और गोपनीयता की शपत लेने के लिए हाथ में गीता भी रखी जा सकती है, ऐसा सोचना थोड़ा कठिन हो चला है लेकिन त्रिनिनाद टोबैगो के की पहली नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने अपने पद की शपथ हाथ में गीता लेकर ली। 26 जून को नोस्ली (पोर्ट ऑफ स्पेन) में एक समारोह में देश के राष्ट्रपति श्री जार्ज मैक्सवेल रिचर्ड ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। दुनियां के लिए यह एक अनोखी घटना है। अबतक गीता अथवा किसी भी भारतीय दर्शन से जुड़ी पुस्तकों को दूसरे अथवा दूसरे देशों के रिलीजियश बुक्स के रूप में देखा जाता रहा, जिसमें उस किताब को भी सबसे अच्छा और श्रेष्ठ बताया गया और उसमें वर्णित परमशक्ति ही उसी नाम से सबसे श्रेष्ट होते हैं लेकिन भारतीय धर्मग्रंथ या दर्शन में ईश्वर के सभी रूपों को परमशक्ति, परमसत्ता, भगवान यहां तक कि कण कण में विराजने वाला बताया है। जरूरत है निर्विकार रूप से इन्हें देखने की।

बुधवार, 7 जुलाई 2010

अब कौन करेगा सन थेरेपी

बिहार के बांका जिले के धोरैया-भगवानपुर में सन थेरेपी देखने को मिला था। सैकड़ों नहीं हजारों लोगों का मुफ्त इलाज, वो भी लीवर का, होते हुए इस इलाके के प्राय: सभी लोगों ने देखा। उगते सूरज के साथ कच्चा धागा और तांत लेकर सूजे हुए लीवर और वहां त्वचा के भीतर से साफ साफ दिखाई देने वाले नीले रंग के हो चुके नस और शिराओँ को महज 21 दिनों में ठीक कर, इतना ही नहीं कई बार तो खाट पर पड़े रोगियों को 21 दिनों के भीतर उठा कर दौड़ा देने की कूवत रखने वाले जगदीश मिश्र की कीर्ति को लोगों ने काफी नजदीक से या ऐसे कहें कि सबकुछ सामने साफ साफ देखा। आमतौर पर हरेक रविवार की सुबह देखा। अब वो जगदीश मिश्र संसार में नहीं रहे। 106 वर्ष की आयु में चलते फिरते जगदीश मिश्र ने 06जुलाई10 मंगलवार की सुबह अपना शरीर त्याग दिया। इलाके में उन्हें कोई ज्योतिषी और कोई तांत्रिक के रूप में जानते थे। हालांकि उनकी पढ़ाई कम हुई थी लेकिन शास्त्रों के जानकार के रूप में उनकी पहचान थी। आज भले ही कई रोगों के लिए सन थेरेपी प्रचलित हो रहा हो लेकिन जिसने उन्हें जब से देखा उसने उनके पास इस विद्या को जरूर देखा। यह एक परंपरागत शिक्षण रहा होगा। अब यह प्रक्रिया कहीं भी देखने या सुनने को नहीं मिलती। इससे भी खास बात एक और कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए वे एक संन्यासी थे। जिनलोगों ने उनका जीवन पास से देखा है वो जानते हैं कि कभी एक पैसा उन्होंने जमा नहीं किया। न तो उनका कोई बक्सा है और न ही कोई थैला जिसमें देहावसान के बाद कोई विरासत ढूंढ सके। मुटठी बांध कर आये थे खुले हाथ चल दिए। ये संदेश दूसरों को भी देते थे लेकिन उपदेश से ज्यादा अपने आचरण से। मन से हठी, हृदय से धनी, समाज के लिए योद्धा के रूप में, खेतों में पूरे किसान, स्वभाव से ज्ञानी और आध्यात्मिक-ऐसे थे जगदीश मिश्र।

सोमवार, 5 जुलाई 2010

भारत बंद रहा, जेडीयू क्यों खुल गए

महंगाई के मुद्दे पर भारत बंद रहा। लंबे समय के बाद एक बड़ा आन्दोलन देखने को मिला। बस सेवा, रेल रेवा यहां तक कि वायु सेवा भी जोरदार प्रभावित हुई, जिससे लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि ज्यादातर लोगों ने अपनी यात्रा पहले से नहीं करने की तैयारी कर ली थी। लोग खुद ही नहीं निकले। इस दौरान बिहार में फिर से नरेन्द्र मोदी के नाम पर राजनीति का मामला उठा। जेडीयू सांसद मोनाजिर हसन से नरेन्द्र मोदी पर टिप्पणी कर दी। इसके कई पहलुओं पर गौर करने की जरुरत है। मोनाजिर ने इसलिए मामला नहीं उठाया कि उन्हें नरेन्द्र मोदी से कुछ लेना देना है, बल्कि इसलिए उठाया कि तसलीमुद्दीन जेडीयू में शामिल हो गए हैं। ऐसे में बिहार में और सत्तारूढ़ दल में मुसलमानों का नेता कौन कहलाए? नीतीश पर मोनाजिर जिन कारणों से दबाव बनाने की कोशिश करते रहे हैं उसमें सेंध लगने की पूरे हालत खड़े हो गए हैं। तसलीमुद्दीन के जेडीयू में आने भर से लालू को झटका तो लगा ही है कांग्रेस के लिए भी झटका ही है। इतना ही नहीं नीतीश के साथ मोनाजिर की दूरी कभी चर्चा में थी, उसे बढ़ाने या पाटने की अब जरूरत नहीं लग रही है, इसलिए मोनाजिर की यह राजनीतिक मजबूरी थी कि नरेन्द्र मोदी को ही हथियार बनाया जाए। फिर भी, नरेन्द्र मोदी पर मोनाजिर के बयान को कई रूप में और संकेत में देखने की जरूरत है। क्योंकि, कांग्रेस लगातार बिहार में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है।

बुधवार, 16 जून 2010

एंडरसन, कांग्रेस और राष्ट्रधर्म

कांग्रेस ने एंडरसन को भगाने के मामले में एक नया और शर्मनाक तर्क गढ़ लिया है। पार्टी की तरफ से लीगल सेल ने बयान जारी किया है कि एंडरसन को भगाना राष्ट्रधर्म था क्योंकि भोपाल के हालात बड़े खराब थे। उसे कोई मार देता तो क्या होता। यह दूसरा नया तर्क है। पहला अर्जुन सिंह के माथे सारा कुछ मढ़ने की कवायद और अब एंडरसन को भगाने को जायज ठहराना। इसके लिए कसाब का उदाहरण भी दे डाला है कि वह दोषी है लेकिन उसकी रक्षा में सरकार लाखों रूपये खर्च कर रही है। अर्जुन सिंह की चुप्पी और उनके उपर ही कांग्रेसियों का आरोप, उसके बाद एंडरसन को भगाने को तर्कसंगत बनाने की कोशिश करना, ये दोनों ही बातें एक ही कड़ी में है। कांग्रेस के सामने पहला लक्ष्य है राजीव गांधी को बचाना। विपक्ष बार बार राजीव गांधी को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। इसलिए कांग्रेस के नेता यह एक नया बयान दे रहे हैं। पार्टी के नेता भी जानते हैं कि इससे बहुत असर पड़ने वाला नहीं है लेकिन कार्यकर्ताओं को बोलने का एक तर्क मिल जाएगा। अब अगर पीसी एलेक्जेंडर अपना मुंह खोलते हैं या कोई संकेत देते हैं तो फिर राजनीतिक बबंडर उठेगा और इसके लिए एक रास्ता कांग्रेसियों ने बना कर रख दिया है ताकि राष्ट्रधर्म के नाम पर कुछ बोला जा सके।

रविवार, 13 जून 2010

भोपाल गैसकांड: एंडरसन गया कैसे?:

एंडरसन को सुरक्षित भगाने की घटना अवाक करने वाली नहीं है। तह में जाने पर कई मामले मिल जाएंगे जो दूसरे देश के हैं और दोषी होने के बावजूद बचाने की कोशिश की गई है। 7 दिसंबर 1984 को एंडरसन भोपाल से सुरक्षित निकल गया। डीएम मोती सिंह, पायलट और एवीएशन के तत्कालीन डायरेक्टर के बयान ने भले ही तूफान खड़ा कर दिया हो, लेकिन अर्जुन सिंह चुप हैं। वे ही मुख्यमंत्री थे। शायद अर्जुन की नई पारी है चुप्पी। गांधी परिवार पर एसहान जताने का उन्हें एक बड़ा मौका हाथ लगा है। कांग्रेसी नेताओं के सामने एक ही बात है कि वे क्या करें क्या न करें। दिग्विजय सिंह ने राज्य सरकार को बचाने की कोशिश की तो बसंत साठे ने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। सत्यव्रत चतुर्वेदी ने केन्द्र को बचाने की कोशिश की और राज्य सरकार यानि अर्जुन सिंह को बलि देने की तैयारी कर ली है। बूटा भी ऐसा ही कुछ बोल रहे हैं। जनार्दन द्विवेदी कहते हैं दिग्विजय और सत्यव्रत के बयान निजी हैं। पायलट और एविएशन डायरेक्तर यूनियन कार्बाइड से अर्जुन सिंह ने मोटा डोनेशन लिया था। अर्जुन अबतक इतना ही कह पाए हैं कि एंडरसन के बारे में उनको लेकर जो खबरे चल रही हैं वे सच नहीं हैं। अर्जुन जी! फिर सच क्या है? अब सवाल उठता है कि भोपाल से दिल्ली तक भले ही अर्जुन सिंह अपने मुख्यमंत्री पद का इस्तेमाल कर भेज दें लेकिन उसके बाद दिल्ली से अमेरिका के लिए आराम से कैसे रवाना हुआ एंडरसन। सवाल ये भी है कि कल तक केन्द्र में अर्जुन सिंह की तूती बोल रही थी लेकिन, इसबार चुनाव होते होते अर्जुन जी क्यों किनारे कर दिए गये। क्या 25 वीं बरसी पर उनको ही बलि बनाने का पूरा खाका तैयार था?

शनिवार, 27 मार्च 2010

होली और 'हाट'

होली के पावन त्योहार में
रंगों के मनभावन फुहार में
भींगे तन-मन अपना जीवन
गुलाल की खुशबू बयार में।
विक्रम संवत 2067 शुभ हो
चैत की गर्माहट अब हो
जीवन की रंगीनियां हो जब
क्यों न डूबें हम प्यार में।
पलाश के रक्तिम यौवन में
महुआ के मदमाते जीवन में
वन-प्रांतर में होता पतझड़
कोलाहल है गांव-जबार में।
याद करें आश्रम-जीवन हम
रंग-गुलाल में डूबा बचपन
चलों करें उसको तरो-ताजा
स्वागत है नेतरहाट परिवार में।
--राजेश रमण (सत्र 1981-88) rajeshraman451@gmail.com
{संप्रति नेतरहाट विद्यालय (पुस्तकालय) में कार्यरत}

रविवार, 7 फ़रवरी 2010

राहुल गांधी के दौरे से किसको क्या मिला

शिवसेना से वाकयुद्ध के बीच 1 और 2 फरवरी 2010 को राहुल गांधी के बिहार दौरे के बाद देश की राजनीति में तूफान आ गया और तीन दिनों तक यह तूफान जारी रहा। राहुल गांधी के बिहार दौरे के पहले ही जेडीयू में टूट के समीकरण बन गए। प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह, सांसद प्रभुनाथ सिंह और पार्टी के प्रवक्ता शिवानन्द तिवारी की नाराजगी को हवा मिली। ललन सिंह ने नीतीश पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिय़ा लेकिन बाकी दोनों अभी चुप हैं। पार्टी में उपेन्द्र कुशवाहा की बढ़ती अहमियत ने कई नेताओं की नाराजगी बढ़ा दी है। जब ललन सिंह इस्तीफे की पेशकश कर रहे थे उस समय नीतीश ने कुछ अलग ही राग अलापा। उस समय वे पटना के मोना टॉकिज में थ्री इडियट्स फिल्म देखने गये थे। उसके बाद शुरू हुआ राहुल गांधी का बिहार दौरा। इसकी शुरूआत की चंपारण के भितहरवा गांधी आश्रम से, जहां से महात्मा गांधी ने नीलहे किसानों का आन्दोलन शुरू किया था। राहुल का विरोध यहां भी देखने को मिला लेकिन बात केवल गांधी जी के आश्रम तक जाने के लिए पास नहीं मिलने जैसी बातों तक आकर रुक गयी। इसके बाद वे दरभंगा पहुंचे। दरभंगा में विरोध हुआ। बात दबी दबी सी थी कि आखिर छात्रों ने क्या पूछा। बताया जाता है कि दरभंगा में पटना के छात्र राहुल राज जिसकी हत्या फर्जी एनकाउंटर में की गई थी, सवाल ऐसा ही कुछ पूछा गया था और राहुल ने चुप्पी साध कर बात टालने की कोशिश की। यहीं से हंगामा शुरू हुआ और इसमें 12 से ज्यादा छात्र घायल हो गए। उसके बाद गया में भी माहौल कुछ खास नहीं रहा। जब वे पटना की चल रहे थे तो उस समय पटना में मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। दूसरे दिन भागलपुर में भी ऐसा ही हुआ। भागलपुर में भी मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट ने काले झंडे से ही राहुल का स्वागत किया। साथ ही वहां छात्रों के साथ ही हंगामा का ही माहौल रहा। पत्थरबाजी भी हुई। पटना में प्रेस कांफ्रेस के दौरान नीतीश के खिलाफ राहुल ने खूब कसीदे पढ़े। नीतीश का इंटेशन सही बताया लेकिन इम्प्लीमेंडटेशन को गलत बताया। राहुल गांधी के बिहार दौरे के समय एक बयान खूब जोर से उछला वो था मुंबई सबके लिए है। 26/11 मुंबई हमले के मुद्दे पर बयान देकर उन्होंने शिवसेना को मुद्दा दे दिया और 5 फरवरी को मुंबई दौरे के समय शिवसेना ने विरोध प्रदर्शन किया जगह जगह काले झंडे दिखाए। राहुल अपने पूर्व निर्धारित गन्तव्य स्थान तक तो पहुंचे लेकिन आम लोगों की जगह उन्होंने सरकार और पुलिस के जवानों के बीच ही रहना पड़ा। उनके रूट पर 144 धारा लागू थी। दिल्ली और महाराष्ट्र की सरकार ने सारी ताकत लगाकर राहुल के लिए माहौल के पक्ष माहौल बनाने की पूरी कोशिश। इस बीच शाहरूख खान का भी मुद्दा खूब उछला। पाकिस्तानी खिलाड़ियों के स्वागत की बात करते ही शाहरुख पर शिवसेना की आवाज उठ गई। लंदन से तो शाहरुख जरूर दहाड़ते रहे लेकिन मुंबई आते ही उनके तेवर ढीले पड़ गए। उन्होंने कहा कि वे ठाकरे के साथ हैं गलतफहमी की वजह से ही विवाद पैदा हुआ और वे जो कुछ हैं, मुंबई की वजह से हैं। इस पूरे खेल में शिवसेना ने मनसे को मात दे दी। मराठी प्रेम खूब जताया।